परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद जी अमर रहे, जय हिन्द – बिन्दु बाला बिन्द

Ghazipur : परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद जी भारतीय सेना की चतुर्थ ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे, जिन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान खेमकरण सेक्टर के आसल उत्ताड़ में लडाई लडे, युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गये, जिसके लिए भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी ने भारत-पाकिस्तान युद्व समाप्ती के तुरन्त बाद 16 सितम्बर 1965 को ही मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाज दिये जबकि देश की आजादी में भाग न लेने वाली आज की आरएसएस भाजपा सरकार परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के नाम पर बने स्कूल, पुल आदि को मिटाने में लगी है।

नाम मिटाने के पीछे का कारण यह है कि कहने को तो हम आज आजाद हैं… पर इस आजादी की कीमत को तो हम पीडिए के पीडित लोग ही समझते है लेकिन शायद संघीय लोग इस आजादी के महत्व को कभी पूरी तरह समझ नहीं पाएंगे क्योकि संघीयो का देश की आजादी में कोई योगदान नही है इसलिए देश की आजादी में किसी भी संघीय के बलिदान होने की कोई भी गाथा न थी और न है क्योकि संघीय लोग देश की आजादी की लडाई लडने वालो के खिलाफ और अंग्रेजो के साथ थे। भला उनको क्या पता कि आजादी की किमत क्या होती है।
अरे आजादी की किमत पूछना है तो पीडिए समाज से पूछिऐ, जिसने देश की आजादी में लहूँ बहाये।
वो माँ जिसने अपने बेटे को देश की आजादी और देश की सुरक्षा के लिए खोया,
वो सैनिक जिसने अपनी नींद त्याग दी ताकि देश का समूचा अवाम हिन्दु मुस्लिम सिख इसाई, महिलाए व बच्चे चैन से सो सके।

सम्मानित साथियों,
देश की खातिर शहीद होने से पहले परमवीर अब्दुल हमीद ने मात्र अपनी गन माउन्टेड जीप से उस समय अजेय समझे जाने वाले पाकिस्तान के पैटन टैंकों को नष्ट किया था। भारतीय सैनिकों के पास न तो टैंक थे और नहीं बड़े हथियार लेकिन उनके पास था भारत माता की रक्षा के लिए लड़ते हुए मर जाने का हौसला, जीतने का जज्बा। भारतीय सैनिक अपनी साधारण थ्री नॉट थ्री रायफल और एल.एम.जी. के साथ पैटन टैंकों का सामना करने लगे। हवलदार अब्दुल हमीद के पास गन माउनटेड जीप थी जो पैटन टैंकों के सामने मात्र एक खिलौने के सामान थी। परमवीर अब्दुल हमीद ने अपनी जीप में बैठ कर अपनी गन से पैटन टैंकों के कमजोर अंगों पर एकदम सटीक निशाना लगाकर एक-एक करके धवस्त करना प्रारम्भ कर दिये। उनको ऐसा करते देख अन्य सैनकों का भी हौसला बढ़ गया और देखते ही देखते पाकिस्तानी फौज में भगदड़ मच गई। परमवीर अब्दुल हमीद ने अपनी गन माउनटेड जीप से सात पाकिस्तानी पैटन टैंकों को नष्ट किया था। देखते ही देखते भारत का असल उताड़ गाँव में पाकिस्तानी पैटन टैंकों की कब्रगाह बन गया लेकिन भागते हुए पाकिस्तानियों का पीछा करते परमवीर अब्दुल हमीद की जीप पर एक गोला गिर जाने से हमारे परमवीर अब्दुल हमीद बुरी तरह से घायल हो गए और अगले दिन 9 सितम्बर की रात को शहीद हो गये लेकिन उनके स्वर्ग सिधारने की आधिकारिक घोषणा 10 सितम्बर को की गई थी। 65 के युद्ध में साधारण गन माउनटेड जीप के हाथों हुई पैटन टैंकों की बर्बादी को देखते हुए अमेरिका को अपने पैटन टैंकों के डिजाइन को लेकर पुनः समीक्षा करना पडा था, जैसे आजकल आरएसएस भाजपा वाले पीडिए के काट के लिए दिन रात समीक्षा कर रहे है लेकिन काट नही मिल पाने से लगातार मीटिंग पे मीटिंग कर रहे है इसलिए 10 सितम्बर सिर्फ एक तारीख नहीं है, ये हमें याद दिलाता है कि हम कितने भाग्यशाली हैं, हम पीडिए के पीडित लोग कितने देशभक्त है और इस दिन को याद कर रहे है तो चाहती हूँ कि इस वारदात को अपने समाजवादी साथियो के साथ बांटूँ क्योंकि हर एक समाजवादी लोग पीडिए समाज की जिंदगी में एक खूबसूरत आजादी की तरह हैं। एक ऐसा साथ, जिसमें अपनापन है, गर्व है, गौरव है और सच्चाई भी है क्योकि पीडिए से निर्मित समाजवाद का जलवा कायम है इसलिए हम समाजवादियों को उम्मीद ही नही बल्कि आशा है कि हम सब मिलकर एक बेहतर भारत बनाएंगे… और एक बेहतर कल भी
जिसमे पीडिए की आवाम की आवाज हो, देश का सौहार्द हो, शान्ति और आपसी भाईचारा हो और इसे बरकरार रखने के लिए संविधान की मूल आत्मा के परिपेक्ष्य में समाजवाद का अनवरत प्रचार प्रसार होकर समाजवाद का पूरे देश में विस्तार हो ताकि संघ, संघीय लोग सत्ता में कभी आने न पाये अन्यथा पीडिए की आने वाली नश्ले और भी पंगु हो जायेगी, हमारी आत्माये बिलबिलायेगी, संविधान खत्म हो जायेगा और मनु का विधान पीडिए के लोगो पर उत्पीडन करके तबाही मचायेगा इसलिए सताईश में समाजवाद की पीडिए सरकार बनाकर माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी, पीडिए जननायक आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी को मुख्यमंत्री बनाना है।
परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद जी व उनकी धर्मपत्नी रसूल बीबी जी के प्रतिमा पर Bindu Bala Bind बिन्दु बाला बिन्द ने पुष्प अर्पित कर श्रद्वांजली अर्पित की ।
जय समाजवाद, जय लोहिया, जय नेताजी।
जय फूलन, जय एकलव्य, जय बिन्द, जय हिन्द ।