जिला गोरखपुर अब बिन्द निषादो का गढ नही रहा-बिन्दु बाला बिन्द Bindu Bala Bind

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जिला गोरखपुर अब बिन्द निषादो का गढ नही रहा-बिन्दु बाला बिन्द
BINDU BALA BIND
BINDU BALA BIND
राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी, पीडीए जननायक आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी के वजह से 2018 में लोकसभा उप-चुनाव जीतने पर पहली बार एहसास हुआ कि गोरखपुर बिन्द निषाद का गढ है लेकिन 2019 में 64-लोकसभा (श्री रामभुआल निषाद जी) चुनाव हारे, 2022 में विधान सभा (320-कैम्पियरगंज-काजल निषाद जी, 321-पिपराईच-अमरेन्द्र निषाद जी पुत्र स्व0 जमुना निषाद जी व राजमती निषाद जी) चुनाव हारे, अभी 2024 में 64-लोकसभा (काजल निषाद जी) चुनाव भी हारे जो लोकतंत्र के चुनावी मेला में 3 बार लगातार हारने के बाद यह कहने में कोई संकोच नही है कि गोरखपुर अब निषादो की राजधानी कहना गलत है इसलिए निवेदन है कि कोई भी बिन्द, केवट, निषाद, मल्लाह, कश्यप अब जिला-गोरखपुर को निषादो का गढ न कहे।
क्योंकि समाज बेचवा, टिकट बेचवा डा संजय निषाद के साथ ही साथ गोरखपुर के बिन्द निषाद केवट कश्यप मल्लाह भी जिम्मेवार है । यदि समाज के लोग संजय व भाजपा के झांसे में नही आते तो जिला-गोरखपुर में कब्जा निषाद समाज का होता। वैसे सुलतानपुर की जनता का धन्यवाद दूंगी जिन्होने ने मेनका गांधी को हराकर यह बताने की काम किये कि सुल्तानपुर बिन्द निषाद केवट कश्यप मल्लाह का गढ है ।
डा संजय निषाद जी अपने मंत्री बनने के लिए बिन्द निषाद केवट कश्यप मल्लाह समाज के हक अधिकार व आरक्षण को आरएसएस मुख्यालय नागपुर में गिरवी रख दिये है इसलिए गुलाम डा संजय निषाद से कुछ भी उम्मीद करना दिन में तारे देखने के समान है क्योकि 2027 में पुनः सभी टिकटो को ठाकुर ब्राम्हणों में करोडों रुपये लेकर बाट देगा।
यह 100 प्रतिशत सत्य है कि देश प्रदेश की सरकार का हिस्सा डा संजय निषाद न तो आरएसएस की सरकार से समाज को आरक्षण दिलवायेगा और न ही समाज को टिकट ही देगा क्योकि डा संजय निषाद करोडों रुपये में टिकट बेचने के मामले में बसपा से भी बहुत काफी आगे है।
साथियों, समाजवादी पार्टी की साइकिल पर सवार होकर प्रवीण निषाद जी ने 14-मार्च, 2018 को गोरखपुर लोकसभा उप चुनाव में बाबा योगी महराज जी का किला ढाह दिये और प्रवीण निषाद जी लोकसभा में पहुचकर समाज के आरक्षण की बात करने लगे लेकिन आरएसएस के दबाव में डा संजय निषाद जी ने अनुसूचित जाति आरक्षण की मांग के बजाय अपने बेटे प्रवीण निषाद जी के लिए एक लोकसभा टिकट का समझौता करके लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा के साथ मिल गये और भाजपा के सिम्बल पर प्रवीण निषाद जी दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद भवन पहुच गये तो संसद भवन पहुचकर आरक्षण मांगना भूल गये के साथ ही साथ जनता से बात करना, उनके सुख दुख में जाना भूल गये तो संत कबीर नगर की जनता ने एटा की जनता का ही ही फार्मूला संजय निषाद जी के पुत्र प्रवीण निषाद जी पर लगा दी और भाजपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद जी को हराकर लक्ष्मीकान्त उर्फ पप्पू निषाद जी को समाजवादी पार्टी से लोकसभा चुनाव जीताकर संसद भवन में भेज दी।
पीडीए की बयार नही, हवा नही बल्कि तुफान है इसलिए 2027 में पीडीए की जनता भाजपा का सूफडा साफ कर देगी।