
गाजीपुर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर मोदी जी ने बिहार की जनसभा में फरमाया, अब हर भ्रष्ट व्यक्ति जेल जाएगा, चाहे वह प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री, यह सुनकर दिल बाग-बाग हो गया – बिन्दु बाला बिन्द
बिन्दु बाला बिन्द ने कहा कि जुमला सुनकर ऐसा लगा कि बस अब भ्रष्टाचार का कचूमर निकलने वाला है लेकिन याद आया कि यह महज एक जुमला है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 से अप्रैल 2024 तक भ्रष्टाचार के आरोपों में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहे 25 बड़े नेता बीजेपी में शामिल हुए। शामिल होने वाले ये सभी नेता कांग्रेस, तृणमूल, शिवसेना, राकांपा, समाजवादी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी कई दलों के थे । भाजपा ज्वाईन के बाद क्या मजाल कि उन्हें निराश किया गया हो क्योंकि 23 नेताओं के दाग तो ऐसे साफ हुए कि जैसे सर्फ एक्सेल का विज्ञापन चल रहा हो कि दाग अच्छे हैं, बशर्ते बीजेपी में शामिल हो जाओ ।
बिन्दु बाला बिन्द ने आगे कहा कि अब देखिए न, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कभी केंद्रीय जांच एजेंसियों का डंडा ऐसा घूम रहा था जैसे आरएसएस शाखा में किसी स्वयं सेवक के हाथ में लाठी लेकिन जैसे ही हिमंता ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की, लाठी रूक गई, दाग धुल गए और हिमंता चमकते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँच गए।
बिन्दु बाला बिन्द ने आगे कहा कि फिर हैं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार. इनके बारे में तो स्वयं मोदी ने भोपाल की सभा में कहा था, 70 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार, लेकिन भाई, वाशिंग मशीन की ताकत देखिए, आज अजीत डिप्टी सीएम हैं और 70 हजार करोड़ का वह आंकड़ा अब शायद ढिनचेक पूजा का रैप बनकर रह गया है। ऐसे ही प्रफुल्ल पटेल, नवीन जिंदल, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चैहान, शुभेंदु अधिकारी, ज्योति मिर्धा, टीडीपी के वाईएस चैधरी, तापस रॉय, संजय सेठ, मधु कोड़ा, गीता कोड़ा, छगन भुजबल, प्रताप सरनाईक, सुदीप्त सेन, हसन मुश्रीफ, यामिनी यशवंत जाधव, कृपा शंकर सिंह, पंजाब के रवींद्र सिंह, दिगंबर कामत, मुकुल रॉय जैसे नेता हैं, जिनकी सूची लंबी है। इनके नाम पढ़कर लगता है जैसे कोई भ्रष्टाचार से भक्ति तक का रियलिटी शो चल रहा हो और उसके होस्ट हैं खुद माननीय प्रधानमंत्री है …
केंद्रीय जांच एजेंसियाँ ईडी, सीबीआई इनके पीछे पड़ती हैं लेकिन इधर से आलू डालो, उधर से सोना निकालो की तर्ज पर इधर से तथाकथित भ्रष्टाचारियों को डालो और उधर से बेदाग निकालो, स्कीम एक्टिव हो जाती है। ये नेता बीजेपी की शरण में जाते हैं और एजेंसियां गायब क्योंकि दूसरे मुर्गे भी तो तलाशने हैं!
बिन्दु बाला बिन्द ने कहा कि विपक्षी गठबंधन, खासकर इंडिया वाले, इस वाशिंग मशीन पर तंज कसकर कहते हैं कि यह क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई है ? यह तो भ्रष्टाचारियों को रिसाइकिल करने का कारखाना है लेकिन बीजेपी का जवाब भी कम मसालेदार नहीं है। वे कहते हैं कि हम तो बस प्रतिभाओं को मौका दे रहे हैं, दागी क्या, दाग तो धोने के लिए ही होते हैं और सचमुच, यह मशीन इतनी जबरदस्त है कि दाग धोने के बाद नेता को नई चमक, नई पैकेजिंग, और कभी-कभी नया मंत्रिपद भी दे देती है। तो भाई, अगर आप भी सोच रहे हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कैसी होती है, तो बस इस वाशिंग मशीन का ढक्कन खोलकर देखिए, इसमें न कोई साबुन चाहिए, न डिटर्जेंट, बस एक बीजेपी की सदस्यता का फॉर्म भरिए और देखिए कैसे दाग छू मंतर हो जाते हैं और हाँ, अगर कोई पूछे कि भ्रष्टाचार कहाँ गया, तो बस मुस्कुराकर कह दीजिए, वह तो भाजपा की वाशिंग मशीन में धुल गया।